कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो सिर्फ किरदार नहीं निभाते, बल्कि अपनी मिट्टी की आवाज़ बन जाते हैं। पिथौरागढ़, उत्तराखंड के मूल निवासी और ‘छोलिया मैन ऑफ उत्तराखंड’ के नाम से प्रसिद्ध देवा धामी भी ऐसे ही कलाकार हैं।
देवा धामी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत थिएटर से की। रज़ा मुराद और टॉम ऑल्टर जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम करते हुए उन्होंने अपने अभिनय कौशल को निखारा। इसके बाद उन्होंने दूरदर्शन, विभिन्न टीवी धारावाहिकों और विज्ञापनों में काम कर अपनी अलग पहचान बनाई।
🎬 फिल्मों के सफर में खास पहचान
साल 2018 में रिलीज़ हुई उनकी पहली फीचर फिल्म ‘छोलियार’ ने उत्तराखंड के पारंपरिक छोलिया लोकनृत्य को एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके बाद फिल्म ‘केदार’ में उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था और पलायन जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उत्तर प्रदेश की फिल्म ‘बुलन छोरा’ में भी उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों से सराहना मिली।
हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म ‘मंगल’ को भी दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। खासकर उत्तराखंड में इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
🌿 सिनेमा के जरिए समाज और संस्कृति की बात
देवा धामी का मानना है कि फिल्में समाज का आईना होती हैं। इसलिए वे किसी भी फिल्म को चुनने से पहले यह जरूर देखते हैं कि वह फिल्म दर्शकों को क्या संदेश देगी और समाज पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
अपने अभिनय के साथ-साथ सामाजिक पहलों के माध्यम से देवा धामी उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक सरोकारों को सहेजने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
उनका यह प्रयास न केवल उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उन्हें एक सशक्त प्रेरणा बनाता है।