अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर; दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत रद्द

पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह चर्चा में हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद बिहार की सियासत में भी हलचल तेज हो गई है।

दरअसल, यह पूरा मामला 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई दुलारचंद यादव की हत्या से जुड़ा है। इस घटना के बाद अनंत सिंह को मामले में आरोपी बनाया गया था। उन्होंने इस मामले में अपनी बेगुनाही की बात कही है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द की जमानत?

इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने मार्च 2026 में अनंत सिंह को जमानत दी थी। इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। अब शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश को रद्द करते हुए अनंत सिंह को निर्धारित समय सीमा के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने बिहार पुलिस को मामले की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश भी दिया है।

JDU से भी हो चुकी है छुट्टी

अनंत सिंह के लिए मुश्किलें केवल कानूनी मोर्चे पर ही नहीं बढ़ी हैं। 24 अक्टूबर 2026 को जनता दल यूनाइटेड ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

पार्टी की ओर से विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर भी कार्रवाई की मांग उठाई गई है।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अनंत सिंह आगे अपनी कानूनी लड़ाई किस तरह लड़ेंगे। उन्हें 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करना होगा। वहीं, पुलिस जांच और इस मामले में आने वाले अगले कानूनी फैसलों पर भी सबकी नजर रहेगी।

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में मोकामा को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

नोट: जमानत रद्द होना दोषसिद्धि नहीं है। मामले में अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर किया जाएगा।

 

Load More Related Articles
Load More By Mili Patwey
Load More In Bihar
Comments are closed.

Check Also

महिला नागा साधुओं को पीरियड्स आते हैं तो क्या करती हैं?

नागा साधुओं की कठिन तपस्या और रहस्यमयी जीवनशैली के बारे में आपने बहुत कुछ सुना होगा, लेकिन…