चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर चुनाव इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। पिछले वर्ष हुए विवादों से सबक लेते हुए प्रशासन ने इस बार मतदान प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया और बैलेट पेपर की जगह हाथ उठाकर वोटिंग कराने का निर्णय लिया। वर्ष 1996 के बाद पहली बार पार्षदों ने खुले तौर पर हाथ उठाकर और मौखिक घोषणा के साथ अपने मत का प्रयोग किया। मतदान प्रक्रिया की निगरानी पीठासीन अधिकारी रमणीक सिंह बेदी ने की।
चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार सौरव जोशी ने बाजी मारते हुए जीत हासिल की। उन्हें कुल 18 पार्षदों का समर्थन मिला। आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवार योगेश ढींगरा को 11 वोट प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह को 7 वोट मिले। सर्वाधिक 18 वोट मिलने के आधार पर सौरव जोशी को विजेता घोषित किया गया।
इस चुनाव की एक और खास बात यह रही कि भाजपा ने कांग्रेस और आप के संभावित गठबंधन के बजाय अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया और स्पष्ट बहुमत के साथ जीत दर्ज की।
मतदान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखने के लिए प्रत्येक पार्षद ने अपना मत व्यक्त करने के बाद संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए। प्रशासन का मानना है कि इस नई प्रणाली से भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की संभावना कम होगी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास और मजबूती आएगी।
चंडीगढ़ में हुए इस ऐतिहासिक मतदान ने न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा पैदा की है, बल्कि स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया को लेकर भी एक नई मिसाल कायम की है।